5/24/2011

लादेन भले ही मरा गया हो लेकिन पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का भारत के खिलाफ जेहाद समाप्त होने वाला नहीं है

अगर विश्व के सबसे छोटे देश मोनाको या युगांडा के सेनाप्रमुखों से भी पत्रकार पूछेंगे कि क्या आपकी सेना भी, एबटाबाद मे लादेन को मारने जैसी कार्रवाई कर सकती है ? तो उसका जवाब होगा हाँ । अतः अगर भारतीय सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह या वायु सेना प्रमुख एअर चीफ मार्शल नायक ने पत्रकारों के जवाब हाँ मे दिये तो इसमे गलत नहीं है । सवाल उठता है कि हम वास्तव मे ऐसा कर सकते है ?
हमारे सेनाप्रमुखों द्वारा पत्रकारों की हांमी में जवाब देने के बाद जिस तरह पाकिस्तान मे बवंडर आ गया हैं, पाकिस्तानी सेना परमुख जनरल कयानी भारत सहित अमेरिका को भी धमकी देने लगे हैं की अगर पाकिस्तान के साथ फिर ऐसी कार्रवाई हुई तो परिणाम भयंकर होंगे । उसके सुर मे सुर मिलाते हुए पाकिस्तानी विदेश सचिव ने तो सीधे सीधे भारत को महाविनाश की धमकी दे डाली हैं । पाकिस्तान की इस बौखलाहट से तो साफ हैं कि कहीं न कहीं पाकिस्तान का मानना हैं कि भारत के पास यह क्षमता हैं । इसमें कोई भी दो मत नहीं हैं कि तीनों भारतीय सेनाओं के पास प्रशिक्षण और हौसला हैं । वह अमेरिका द्वारा ओसामा बिन लादेन के संदर्भ में किए गाएँ सामरिक ऑपरेशन जिसको सामरिक भाषा में 'रेड' कहते हैं, कर सकती है कड़वा सच यह हैं कि भारतीय सेनाओं के पास क्षमता तो जरूर हैं पर अमेरिका के उलट हमारे राजनेता और यनके ही सामरिक ज्ञान से अनभिज्ञ नौकरशाहों, सलाहकारों के चलते यह भारत के लिए संभव नहीं है । इस तरह के सामरिक ऑपरेशन में सबसे अधिक महत्व ठोस गुप्तचर खबर (इंटेलिजेंस) का होता हैं । अमेरिका की गुप्तचर संस्था सीआईए को पिछले वर्ष अगस्त महीने में ही खबर लग गई थी कि ओसामा बिन लादेन 'एबेटाबाद' मे एक आलीशान हवेली मे रह रहा है ।
मई 1999 में जब भारतीय सेना को पूरा यकीन हो गया कि कार्गिल में जेहादी नहीं पर जेहादियों सी सलवार कमीज की पोशाक पहने पाकिस्तान की असली सेना घुस आई है तब उन्होने भारतीय वायुसेना से हेलिकॉप्टर गनशिप कि मदद मांगी । भारतीय वायुसेना ने थल सेना को टका सा जवाब दे दिया कि आप पहले भारत सरकार से इसकि अनुमति लीजिये ! इस अनुमति को आने मे 15 दिन लग गए इस बीच पाकिस्तानियों ने तो अपने मोर्चे पकके कर लिए । बहुत से हमारे सैनिक वीर गति को प्राप्त हो गए चूंकि यह बिना वायुसेना की मदद के ही इन दुर्गम पहाड़ियों पर बनाएँ गए पाकिस्तानी सेना के मोर्चे पर हमले करते रहे ।
सीआईए ने इस हवेली के पास चुपचाप एक मकान किराए पर लिया और अपने गुप्तचर वहाँ रख कर पूरे दस महीने इस हवेली को अपनी नजर मे रखा । इस हवेली के एक एक कमरे का खाका बनाकर वापस अमेरिका को भेजा अमेरिका में इस पूरी हवेली का ढांचा बनाया गया और वहाँ पर अमेरिकी कमांडो ने इस ऑपरेशन का पूरे एक महीने तक अभ्यास किया ।अमेरिकी राष्ट्रपति अपने सेनिक सलाहकारों के साथ बैठकर दैनिक रूप से इस अभियान कि व्याख्या कराते थे एवं स्वयं नई आती गुप्तचर खबरों पर नजर रखते थे अंत में जब ओबामा को पूरा भरोसा हो गया कि हाँ इस हवेली मे ओसामा छिपा हो सकता है तब 30 अप्रैल 2011 को उन्होने लिखित में आदेश पर हस्ताक्षर किए कि इस अभियान को लागू किया जाएँ । क्या हमारा कोई शीर्षराजनेता इस तरह अपने पर पूरी जिम्मेदाती लेने और अपनी सेना को इस तरह साफ लिखित में आदेश देने में समर्थ हैं ?
26/11 के मुंबई हमले के समय भारतीय सेना प्रमुखों ने हमारी सरकार को सुझाव दिया कि हम लोग कश्मीर में नियंत्रण सेना के उस पार चल रहे पाकिस्तानी पोषित जेहादी प्रशिक्षण शिविरों पर सर्जिकल हमले करने को तैयार हैं, तो हमारे राजनेताओ कि हवा खिसक गई, तब राजनेताओ ने कहा कि वह अब पाकिस्तान से तभी बात करेंगे जब पाकिस्तान इन मुंबई हमलावरों को दंडित करता हैं । पाकिस्तान ने ऐसा कुछ नहीं किया हैं और तो और पाकिस्तान के विदेश सचिव ने हाल में व्यक्तव्य दिया हैं कि भारत को 26/11 कि रात नहीं लगाना चाहिए चूंकि अब यह मामला 'एकस्पाइर' हो गया है बहुत खूब । वहीं अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को 9/11 के जुर्म में 11 वर्षों के बाद अभी 1 मई को मार गिराया हैं इसके बाद भी हमारे राजनेता पाकिस्तान से बातचीत करने के लिए दंडवत है । अफजल गुरु जो कि पाकिस्तान कि शह पर वर्ष 2011 में भारतीय संसद पर हमले का दोषी पाया गया हैं और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी उसकी फांसी कि सजा बरकरार राखी है वह अभी तक जिंदा मजे मार रहा है और हमारे राजनेता उसके लिए फांसी कि 'डोर की काट' में ढूँढने मे लगे है ।
[caption id="attachment_2226" align="alignright" width="192" caption="लादेन की हवेली के पीछे का दृश्य"][/caption]अमेरिका की सीआईए की तरह ही भारत की खुफिया संस्था है रॉ , इनको पहले भारत में गुनाह करके विदेशों में भागे हुए लोग खासकर दुश्मन जो आज पाकिस्तान की शरण में हैं के खिलाफ खुफियान ऑपरेशन चलाने का अधिकार था हमारे एक चंद दिनों प्रधानमंत्री रहे राजनेता हिन्दी-पाकी भाई भाई के नारे से इतने भाव विभोर हो गए की उन्होने रॉ के यह अधिकार भी समाप्त कर दिये हैं जो उन्हें वापस नहीं मिले हैं । ओसामा बिन लादेन भले ही मारा गया हो पाकिस्तान की सेना और आईएसआई का भारत के खिलाफ जेहाद समाप्त होने वाला नहीं है । भारत के लिए नितांत आवश्यक हैं कि वर्ष 2003 से पारित पर लंबित पड़ी भारतीय सैन्य तंत्र कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ प्रणाली जिसने तीनों सेनाओ के बीच समन्वय बैठाना हैं और एक ही खिड़की से भारतीय राजनेताओ को सामरिक सलाह देना हैं तुरंत लागू कि जाए भारतीय गुप्तचर संस्था रॉ को विदेशों में अभियान चलाने के लिए फिर से सक्षम बनाया जाए सबसे जरूरी है कि हमारे राजनेता अपनी धोतियाँ कसें, अपने अंदर आक्रामक राजनीति इच्छा शक्ति को जगाएँ, भारतीय सैन्य तंत्र को अपने विश्वास में लें तथा पाकिस्तान के सिर पर ओसामा जैसे अभियानों कि तलवार टांग दें !